है ! माता पिता की सेवा को ईश्वर
की सेवा का दर्जा दिया गया है ! माँ बाप को देवता से ऊपर का स्थान दिया
गया है ! आज उसी देश मे माँ बाप की देखभाल के लिए कानून बनाना पड
रहा है ! यह घोर विडंबना है कि जिस देश मे राम , भीष्म और पुंडरिक
जैसे आज्ञाकारी पुत्र हुए जिस देश मे श्रवण कुमार अपने अंधे माँ बाप
को कावड मे बिठाकर तीर्थयात्रा करवाता था उसी भारत की संसद को माता पिता
की देखभाल करने के लिए कानून बनाना पड़ रहा है ! जिस समाज में बुजर्गो का
सम्मान न हो उन्हें अपनों से प्रताड़ना मिले ऐसे समाज को धिक्कार है !
अब तो हालत यह है कि चलने फिरने की हालत मे जो माँ बाप है उनको भी
अपने साथ कोई रखना नहीं चाहता है ! सब आज़ाद जीवन हा जीना चाहते है कोई बंदिश
नहीं चाहते ! आज रिश्तों की डोर इतनी कमजोर हो गयी है की स्वार्थ का
झटका उन्हें तोड़ सकता है ! हमारे आस पास ऐसे कई दर्जनों उदाहरण
भी मिल जायेंगे जंहा अच्छे ख़ासे कमाते बच्चे होने के बाद बुजुर्ग दर दर की
ठोकर खा रहे है ! दिल मे भी माता पिता के लिए जगह नहीं रह गयी है ! हम
लोग ये क्यों नहीं सोचते की हम भी एक दिन उम्र के उस पड़ाव पर
पहुँचेंगे जहा पर आज हमारे माता पिता बुजुर्ग है ! इस बच्चे को माता
पिता अपना सब कुछ दे देते है पालन पोषण करते है वही बच्चा एक दिन
उम्र के आखिरी मोड़ पर अपने माता पिता का साथ छोड़ देता है ! बजुर्गो
को दुत्कारो मत क्युकि झुर्रियो से भरे चेहरे और आशीर्वाद देते हाथो का
अपना एक अलग ही महत्व होता है ! पीड़ित बुज़ुर्ग ने घर मे मार पीट
गाली गलोच करने , समय पर खाना नहीं देने बात बात पर ताना मारने का
मामला भी दर्ज करवाए है केवल कानून बनाने से ही माता पिता के प्रति
नैतिक कर्तव्य की पूर्ति नहीं होगी ! इसके लिए लोगो को जाग्रत करने की
आव्यशकता है !Labels: article